कृषि में ड्रोन के विभिन्न उपयोग

ड्रोन प्रौद्योगिकी पारंपरिक कृषि पद्धतियों को तीव्रता के साथ बदल रही है और उन्हें निम्नानुसार पूरा कर रही है-फसलों की बिमारियों, पोषक तत्वों की कमी और कीटों/खरपतवार की उपस्थिति का पता लगानाव्यक्तिगत रूप से फसलों के स्वास्थ्य की देखभाल करना एक कठिन और बहुत समय लेने वाला हो सकता है.

ड्रोन से नियर-इन्फ्रारेड (NIR सेंसर, मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर या सामान्यीकृत अंतर वनस्पति सूचकां; NDVI सेंसर के साथ खेत का मानचित्रण किया जाता है,

इन मानचित्रों में अंकित विभिन्न रंगों का विश्लेषण करके खेत के विभिन्न भागों में फसल के स्वास्थ्य, खरपतवार की उपस्थिति, बीमारी के प्रकोप और कीटों के संक्रमण का पता लगाया जाता है। कुछ नए ड्रोनों में इस विश्लेषण को स्वचालित सॉफ्टवेयर द्वारा खुद-ब-खुद करने की क्षमता भी होती है।

मिट्टी में नमी का पता लगाना और सिंचाई की योजना बनाना

ड्रोन में उपस्थित हाइपरस्पेक्ट्रल, थर्मल या मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर से उन क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं जो बहुत शुष्क होते हैं या जिनमें जल भराव की समस्या होती है। यह फसलों में वाष्पीकरण और फसल वाष्पोत्सर्जन की निगरानी करता है और वनस्पति सूचकांक की गणना भी करता है जिससे सिंचाई की सटीक योजना बनाई जा सकती है। इससे उपलब्ध जल को अधिकतम दक्षता के साथ प्रयोग किया जा सकता है।

कीटनाशक और उर्वरकों का सटीक छिड़काव

ड्रोन पारंपरिक ट्रैक्टर की तुलना में कहीं अधिक सटीकता के साथ खेतों को स्कैन करके और फसलों और विभिन्न क्षेत्रों में सही मात्रा की तुरंत गणना करके कीटनाशक और उर्वरकों का तेज और किफायती छिड़काव कर सकता है। इससे जमीन की शुद्धता भी बनी रहती है और इन रसायनों के अविवेकपूर्ण प्रयोग पर रोक लगाता है,

ड्रोन केवल 15-20 मिनट में लगभग 2.5 एकड़ में कीटनाशकों/उर्वरकों को छिड़क सकते हैं। आकस्मिक कीटों के आक्रमण जैसे कि टिड्डियों के झुंड, के उन्मूलन के लिए ड्रोन का उपयोग करना एक तत्काल, प्रभावी और व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

फसलीय नुकसान का आकलन और दस्तावेजीकरण

मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर और आरजीबी सेंसर के साथ लगे कृषि ड्रोन से किसान बीमा दावों के लिए फसलीय क्षति का सटीक आंकलन एवं दस्तावेजीकरण भी कर सकता है। सर्वेक्षण करने के लिए ड्रोन का उपयोग करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल है,

कृषि ड्रोन स्वचालित रूप से ऑनबोर्ड सेंसर और अंतर्निर्मित कैमरे का उपयोग करके तस्वीरें लेता है, और प्रत्येक चित्र लेने के बाद यह उस जगह को उस चित्र में अंकित करने के लिए जीपीएस का उपयोग करता है। इस तरह चित्रीय दस्तावेजीकरण डिजिटल प्रारूप में ड्रोन में उपस्थित मेमोरी कार्ड में जमा हो जाता है।

बंजर भूमि या बड़े क्षेत्र में बीजों का रोपण

बंजर या दुर्गम भूमि में बीजरोपण का कार्य दुष्कर, महंगा और समय को नष्ट करने वाला हो सकता है। कृषि ड्रोन, सेंसर तकनीक और इंटेलिजेंट सिस्टम द्वारा इस रोपण को बहुत आसान बनाते हैं। रोपण प्रणाली से लैस ड्रोन सीधे मिट्टी में बीज को लगा सकते हैं। यह कार्य ड्रोन के द्वारा सीड पॉड्स को मिट्टी में सीधा फायरिंग करके किया जाता है,

कुछ ड्रोन एक दिन में लगभग एक लाख तक बीज बो सकते हैं। इससे कृषि वानिकी को भी अप्रत्याशित लाभ मिलता है।

लेखक:

डॉ. ब्रिजबिहारी पाण्डे, डॉ. राम्या के. टी. , डॉ. रत्ना कुमार पसाला एंव डॉ. पप्पू लाल बैरवा

पादप कार्यिकी, आई.सी.ए.आर.-आई.आई.अ¨.आर., राजेन्द्र नगर हैदराबाद

उद्यानिकी महाविद्यालय, धमतरी, इं.गा.कृ.वि.वि., रायपुर


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