केला उत्पादक किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव

उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक श्री आर.एन.एस.तोमर ने केला उत्पादक किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं । उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में जिले में तापमान कम हुआ है, अतः केले के बगीचों की सूखी पत्तियों को काटकर बाहर करें तथा पुरानी पत्तियों व डंठल को निकाल कर खेत के बाहर ढेर लगाकर उस पर 1 प्रतिशत बाविस्टीन घोल का छिड़काव करें एवं बगीचे को हवादार बनाएं ।

केले कंद (बीज) देखे हुए बगीचों से लें, जो कि निरोगी हो साथ ही कंद को रोपण के पूर्व  1 प्रतिशत बाविस्टीन घोल में डूबोकर (5-10 मिनट) ही लगाएं । बगीचे में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देवें तथा तैयार फलों पर कीटनाशक का छिड़काव न करें। नवीन बगीचे जिसमें कि टिश्यू कल्चर के पौधे लगाए  जा रहे हैं उनके साथ ढेचा बीज अवश्य बोएं , जिससे जमीन की ऊर्वरा शक्ति बनी रहेगी , खाद की मात्रा कम लगेगी और उत्पादन में लाभ होगा। नये टिश्यू  कल्चर के पौधे 12 इंच से छोटे न लगाएं । साथ ही उन पर शुरूआत में कीटनाशक दवा का हाई डोज न डालें , अन्यथा पौधे खराब होने की सम्भावना ज्यादा रहेगी। उन्होंने बताया कि केला फसल से अधिक उत्पादन एवं उच्च गुणवत्ता के केले   हेतु 12 के बजाय 16 मिमी  ड्रिप लाईन का उपयोग करना अधिक लाभप्रद होगा।  


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