गेहूं में पौध संरक्षण

गेहूं में पौध संरक्षण –

गेहूं की फसल में बथुआ, कडबथुआ, कडाई, जंगली पालक, सिटिया घास/गुल्ली डंडा, प्याजी जंगली जई आदि खरपतवार पाये जाते हैं। इनके उन्मूलन के लिये कस्सी/ कसोला से निराई गुड़ाई करें। अधिक मात्रा में खरपतवार होने पर निम्नलिखित खरपतवारनाशी का प्रयोग करें।

गुल्ली डंडा जंगली जई

500 ग्राम आइसोप्रोट्यूरान (ऐरिलान, टोरस, रक्षक, आइसोगार्ड) या 160 ग्राम टोपिक/पोईट 120 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 35-45 दिन के बाद स्प्रे करें। कंडाई या अन्य चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के विनाश के लिये मैटसल्फ्यूरान (एलग्रिप, एलगो, हुक) 8 ग्राम/एकड़ की दर से बिजाई के 30-35 दिन बाद स्प्रे करें।

जस्ते की कमी

हल्की भूमि में जस्ते की कमी होने पर नीचे से तीसरी या चौथी पुरानी पत्ती के मध्य में हल्के पीले धब्बे दिखाई देते हैं। ऐसे लक्षण होने पर 5 किग्रा यूरिया और एक किग्रा जिंक सल्फेट 200 लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें।

बीमारियां एवं रोकथाम

गेहूं की फसल में पीला, भूरा या काला रतुआ दिसम्बर, जनवरी/फरवरी में कम तापक्रम होने से आता है। रोगरोधी किस्मों के अलावा 800 ग्राम डाइथेन एम-45 का 250 लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव कर दें। ममनी, टुण्डू रोग या मोल्या रोग नियंत्रण हेतु 6 कि.ग्रा. टैमिक 10जी या 13 कि.ग्रा. फ्यूराडान 3 जी/एकड़ बिजाई के समय दें।

Source: Krishakjagat.org


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