ग्यारहवें से बारहवें सप्ताह में सोयाबीन मे की जाने वाली अच्छी कृषि पद्धतियां

चारकोल सड़ांध, राख या तना झुलसा या सूखी जड़ सड़न:charcoal rot (Macrophomina phaseolina ) on common bean (Phaseolus vulgaris  ) - 5365952Charcoal Rot - Soybean Disease - Soybean Research & Information Network -  SRIN

लक्षण:

  • यह रोग तब होता है जब पौधे नमी के दबाव में होते हैं या नेमाटोड हमले के तहत या मिट्टी के संघनन के माध्यम से या पोषक तत्वों की कमी के कारण हो सकते हैं।
  • यह सोयाबीन के पौधे का सबसे आम बेसल तना और जड़ रोग है।
  • निचली पत्तियाँ क्लोरोटिक हो जाती हैं और मुरझा कर सूख जाती हैं।
  • रोगग्रस्त ऊतक आम तौर पर भूरे रंग के, मलिनकिरण विकसित करते हैं।
  • स्क्लेरोटिया काले चूर्ण जैसा दिखता है इसलिए इस रोग को चारकोल रोट के रूप में जाना जाता है।
  • जड़ों का काला पड़ना और टूटना सबसे आम लक्षण है।
  • कवक मिट्टी और फसल के मलबे में शुष्क परिस्थितियों में जीवित रहता है।
  • शुष्क परिस्थितियाँ, अपेक्षाकृत कम मिट्टी की नमी और पोषक तत्व और तापमान 25 oC से 35 oC तक रोग के लिए अनुकूल होते हैं।

प्रबंधन:

  • गर्मियों में गहरी जुताई करें।
  • फसल का संतुलित उर्वरीकरण सुनिश्चित करें।
  • सोयाबीन को अनाज के साथ घुमाएं।
  • अच्छी जल निकासी वाले खेत को बनाए रखें
  • पिछले वर्षों के संक्रमित ठूंठ को नष्ट करें।
  • टी. विराइड @ 4 ग्राम/किलोग्राम या पी. फ्लोरेसेंस @ 10 ग्राम/किलोग्राम बीज या कार्बेन्डाजिम या थीरम 2 ग्राम/किलोग्राम बीज से उपचार करें।
  • कार्बेन्डाजिम 1 gm/लीटर या P. fluorescens/T. viride 2.5 kg/ha के साथ 50 kg FYM के साथ स्पॉट ड्रेंचिंग

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