एकीकृत हानिकारक कीट प्रबंधन के साथ मिलाकर उचित खेती के तरीकों को लागू करने से इस बीमारी के नुकसान को कम किया जा सकेगा।
कल्चरल नियंत्रण
1. स्वस्थ फसलों में रोग के संक्रमण को रोकने एवम् इनोकुलम के प्राथमिक स्रोत को कम करने के लिए रोगयुक्त ककड़ी वंश सब्जियों और खरपतवार लताओं को हटा देना चाहिये।
2. पौधे से रोगग्रस्त पत्ते को हटा देना चाहियें और जमीन पर गिरे हुए मलबे को भी साफ कर देना चाहियें।
3. पौधों में वायु परिसंचरण में सुधार के लिए छंटाई की जानी चाहिए ।
4. खेत में पानी सुबह के समय देना चाहिए, ताकि पौधों को दिन में सूखने का मौका मिले। ड्रिप-इरिगेशन क उपयोग पत्ते को सूखा रखने में मदद करेंगा।
5. अच्छी हवादार, जलनिकासी और कम नमी वाली जगहों का उपयोग करना चाहियें ।
6. प्रतिरोधी किस्मों का उपयुक्त चयन करना चाहियें ।
7. उर्वरक का प्रयोग मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर किया जाना चाहिए । उर्वरक विशेष रूप से नाइट्रोजन के अधिक प्रयोग से बचना चाहिए ।
रासायनिक नियंत्रण
1. रोग के लक्षण नजर आने पर प्रति एकड़ जमीन में 10 किलोग्राम गंधक के चूर्ण का छिड़काव करें।
2. खड़ी फसल में प्रतिलीटर पानी में 2 मिलीलीटर कार्बेन्डाज़िम मिलाकर छिड़काव करें।
3. प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम मैंकोज़ेब मिलाकर भी छिड़काव करने से भी इस रोग पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है ।
4. आवश्यकता होने पर 10 से 15 दिनों के अंतराल रसायन का दोबारा छिड़काव करें ।
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