प्लास्टिक पलवार को बिछाते समय ध्यान रखने योग्य बातें

प्लास्टिक पलवार को बिछाते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • पलवार को बिछाने से पूर्व कृषि क्रियायें जैसे-खेत जोतना, खरपतवार हटाना, गोबर खाद मिलाना एवं सिंचाई इत्यादि कार्य कर लिये जाने चाहिए।
  • प्लास्टिक फिल्म को अधिक नहीं खींचना चाहिए।
  • प्लास्टिक फिल्म को अधिक गर्मी वाले दिनों में नहीं बिछाना चाहिए।
  • पौधों की रोपाई एवं बीजों की बोआई पलवार के छिद्रों में करनी चाहिए।

सब्जियों में पलवार बिछाना

पलवार को फसल की बोआई या रोपाई से पूर्व लगाया जाता है। खेत में क्यारी बनाने के बाद प्लास्टिक पलवार को बिछा कर किनारे से दबा दिया जाता है, जिससे वह हवा से इधर-उधर ना उड़ सके। आजकल ट्रेक्टर द्वारा पलवार बिछाने वाली मशीन भी उपलब्ध है, जिससे समय व धन की बचत होती है।

फलदार वृक्षों में पलवार बिछाना

पौधें को प्लास्टिक पलवार फिल्म के बीच में जहाँ छिद्र किया गया है, वहाँ लगाया जाता है एवं चारों ओर के जगह को प्लास्टिक फिल्म से ढँक दिया जाता है। फलदार वृक्षों के रोपण के बाद प्लास्टिक फिल्म के बिछाया जाता है। पुराने बागों में वृक्षों के थाले के आकार के बराबर की प्लास्टिक पलवार फिल्म का टुकड़ा काटकर बिछाया जाता है, फिर उसे अच्छी तरह चारों तरह से मिट्टी से दबा दिया जाता है, ताकि फिल्म हवा से न उड़ सके पाये।

प्लास्टिक पलवार को बिछाने के बाद सिंचाई प्रबंधन

प्लास्टिक पलवार को बिछाने के बाद खेत व बाग में सिंचाई और खाद डालने के लिए ड्रिप सिंचाई (बूँद-बूँद) प्रणाली उपयुक्त होती है। यदि ड्रिप सिंचाई संभव न हो तो एक तरफ से फिल्म को खुला कर नाली के सहारे भी सिंचाई की जा सकती है।

फलों एवं सब्जियों के लिए उपयुक्त पलवार एवं उनका प्रभाव:-

फसलपलवार की मोटाई (माइक्रोन)उपज में वृध्दि (प्रतिशत)
फल
अमरूद10025-30
स्ट्राबेरी2540-50
अनार10025-30
केला5035-40
अनन्नास5030
ऑंवला10020-25
नीबू10020
सब्जियाँ
मिर्च, भिण्डी2550-60
आलू, बैंगन2530-40
शिमला-मिर्च, टमाटर, फूलगोभी2540-50

प्लास्टिक पलवार पर सब्सिडी

भारत सरकार द्वारा किसानों को प्लास्टिक पलवार के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाती है। यदि किसान पलवार का उपयोग 1 हेक्टेयर क्षेत्र में करता है, तो प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 20,000 रु. का 50 प्रतिशत अधिकतम 10,000 रु. प्रति हेक्टेयर सहायतानुदान दी जाती है।

यह सहायतानुदान राषि राष्ट्रीय उद्यानिकी मिषन व अन्य संबंधित योजनाओं द्वारा प्रदाय की जाती है। ये सारी योजनायें राज्य सरकार के द्वारा उद्यानिकी विभाग के अंतर्गत कार्यान्वयित की जाती है। इच्छुक कृषक अपने जिला के सहायता निदेशक, उद्यानिकी कार्यालय से सम्पर्क कर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं


 Authors:

सरिता पैकराहेमन्त पाणिग्रही, संगीता चंद्राकर एवं पुनेश्वर सिंह पैकरा

फल विज्ञान विभाग

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषक नगर, रायपुर


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