कृषि भूमि, पशुधन, वानिकी और मत्स्य पालन के प्रबंधन का एकीकृत दृष्टिकोण जलवायु स्मार्ट कृषि – क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर है जो बदलती जलवायु और खाद्य सुरक्षा की आपस में जुड़ी हुई चुनौतियों का निराकरण करता हैं।
हमारी जनसँख्या में दिन प्रतिदिन तेज गति से वृद्धि हो रही है, लेकिन बढ़ती हुई जनसँख्या की खाद्य पूर्ति के लिए उत्पादकता उस दर से नहीं बढ़ रही है । इंसान ने अपने फायदे के लिए प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग इतने अँधाधुंध तरीके से किया है कि हमारी मृदा, वायु, जल सब प्रदूषित हो चुका है और ग्लोबल वार्मिंग के चलते हमारी जलवायु में परिवर्तन आ रहा है ।
आज जब कृषि क्षेत्र में रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से उत्पादकता में पहले ही स्थिरता आ चुकी है, ऐसे में जलवायु में बदलाव के कारण बिना अपने वातावरण को क्षति पहुंचाए उत्पादकता को बनाये रखना भी एक चुनौती है । जलवायु बदलाव के नकारात्मक प्रभाव सामान्य तापमान में वृद्धि, मौसम परिवर्तनशीलता, पारिस्थितिक बदलाव, नए कीट व बिमारियों के रूप में देखा जा सकता है।
जलवायु स्मार्ट खेती उन लोगों की मदद करने का एक तरीका है जो कृषि प्रणालियों का प्रबंधन करते हैं ताकि जलवायु परिवर्तन के लिए प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सके ।
जलवायु स्मार्ट खेती के तीन मुख्यः उद्देशय है
- उत्पादकता और आय में लगातार वृद्धि
- जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलना
- जहां संभव हो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना
एफ.ए.ओ. – संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन, की व्याख्या के अनुसार यह जरूरी नहीं है कि प्रत्येक स्थान जहां भी जलवायु स्मार्ट खेती की जाये, वहां पर तीनो उद्देशय एक साथ समाहित हो ।
जलवायु स्मार्ट खेती निश्चित रूप से क्रियाओ का संग्रह नहीं है बल्कि यह एक दृष्टिकोण है जो स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तत्वों को सम्मिलित करता है।
विश्व बैंक जलवायु स्मार्ट खेती के अंतर्गत अनेक देशों को निधि प्रदान कर रहा है जिसमे महाराष्ट्र प्रोजेक्ट फॉर क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर सबसे बडी जलवायु स्मार्ट खेती परियोजनाओं में से एक है। बैंक ने अब तक इसे वित्तपोषित किया है व अनुमान है कि 386 मिलियन यू. एस. डॉलर के जलवायु परिवर्तन में सुधार होगा। जून 2020 तक 309,800 परियोजना लाभार्थियों ने जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाया है और 56,602 हेक्टेयर भूमि बेहतर सिंचाई और जल निकासी प्रौद्योगिकियों से लाभान्वित हुई है।
जलवायु स्मार्ट कृषि पद्धतियां है
फसल प्रबंधन
अनाज वाली फसलों के साथ दलहनी फसल जैसे धान के साथ सोयाबीन का अंतरफसल करना, प्रतिरोधक किस्मे, फसल विविधता, फसलों को तनाव से बचाने के लिए जैविक नियामकों का प्रयोग, बेहतर भंडारण एवं प्रसंस्करण तकनीकों & इ-नाम एप के प्रयोग से फसल को प्रबंधित किया जाता है ।
पशु प्रबंधन
पशुओं को चारा खिलाने के अलग अलग तरीके जैसे आवर्तनशील चराई और चारे वाली फसलें लोबिया, बरसीम इत्यादि, बेहतर पशुधन स्वास्थय, चरागाहों को रिस्टोर करना एवं उनका संरक्षण करना और अच्छे से खाद उपचार करना इनमे सम्मिलित है ।
मिट्टी और जल प्रबंधन
संरक्षण कृषि जिसमे न्यूनतम जुताई, मिट्टी की सतह पर स्थायी वानस्पतिक आवरण या गीली घास का रखरखाव व फसल विविधता शामिल है। समोच्च रोपण, छत और मेड, रोपण गड्ढे, जल भंडारण, बांध, गड्ढे, बेहतर सिंचाई तकनीक जैसे टपका सिंचाई जल प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है ।
कृषि वानिकी
खेत की मेड पर पेड़ अथवा हेज लगाना & नाइट्रोजन स्थिर करने वाले पेड व बहुउद्देशीय पेड़ों की खेती, वुडलॉट्स एवं फलों के बगीचे इत्यादि लगाकर कृषि वानिकी की जाती है।
एकीकृत खाद्य ऊर्जा प्रणाली
अपने फार्म पर उपस्थित अवशेषों से बायोगैस का उत्पादन करके एवं उस बायोगैस को अपने फार्म पर ही उपयोग करके किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर पाता है।
जलवायु स्मार्ट खेती को अपनाने से वर्तमान स्थितियों को और खराब होने से रोका जा सकता है और खाद्य सुरक्षा पर मंडराते खतरों से भी बचा जा सकता है।
लेखक:
कविता एवं श्वेता
सस्य विज्ञान विभाग, चै. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

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