कम्पोस्टिंग
गाय का गोबर, कृषि अवशेष, खरपतवार आदि के कचरे की २० सेमी की एक परत बनाकर उसको वेस्ट डीकम्पोजर से गीला कर देते है। यह विधि दोहराते रहे। हर सात दिन पर ढेर को पलटते रहे। इसमें हमेशा नमी बनी रहनी चाहिए।घरेलू कचरे से भी कई एकड़ जमीन के लिए बेहतरीन खाद भी तैयार कर सकते हैं।
फसल अवशेषों का अपघठन
वर्तमान समय में फसल कटाई के लिए कम्बाईन हार्वेस्टर का उपयोग बढ़ गया है। इससे फसल के अवशेष खेतों में ही रह जाते हैं, जिन्हे किसान बाद में जला देते हैं। इन अवशेषों को जलाने से मिट्टी के सूक्ष्म तत्व नष्ट हो जाते हैं। डिकम्पोजर के माध्यम से इन अवशेषों को सड़ाकर खाद बनाने से किसानों को बहुत फायदा होगा।
वेस्ट डीकम्पोजरको फसल की कटाई के बाद खेत में सिंचाई के साथ और पानी की कमी वाले क्षेत्रो में मानसून के समय डालते है। इससे 40-45 दिन के अंदर अवशेष सड़ जाते है और बाद में उत्तम किस्म का खाद बन जाता है। इस हेतु 200 लीटर घोल को एक एकड़ मृदा में उपयोग करते है।
जैव कीटनाशक व जैव पीड़कनाशक
फसलों में कीटों व रोगो के प्रकोप को दूर करने हेतु वेस्ट डीकम्पोजरके घोल का उपयोग करते है, इसके लिए तैयार घोल के एक भाग को पानी के 40 भाग में मिलाकर पत्तो पर छिड़काव हेतु प्रयोग करते है। इससे मृदा जनित और बीज जनित रोगो का नियन्त्रण होता है।
वेस्ट डिकम्पोजर की प्रयोग विधि
बीज उपचार द्वारा
एक बोतल वेस्ट डीकम्पोजरमें उपस्थित सामग्री को 30 ग्राम गु़ड़ के साथ अच्छी तरह मिलाएं। यह मिश्रण 20 किलो बीजों को उपचारित करने हेतु पर्याप्त है। बीजों को उपचारित करने के बाद 30 मिनट छायादार स्थान पर सुखा लें।आधे घंटे बाद बीज बुआई के लिए तैयार हो जाता है।
पत्तो पर छिड़काव–
फसल में कीट व रोगो को नियंत्रित करने हेतु तैयार किये हुए वेस्ट डीकम्पोजरके एक भाग को पानी के 40 भाग में मिलाकर पत्तो पर छिड़काव हेतु प्रयोग करते है।
सिंचाई द्वारा–
वेस्ट डीकम्पोजर को सिंचाई के साथ भी प्रयोग कर सकते है। 200 लीटर कल्चर घोल को एक एकड़ जमीन में टपक सिंचाई के द्वारा दिया जा सकता है।
लेखक:
सुमित्रा देवी बम्बोरिया, जितेंद्र सिंह बम्बोरिया एवं शांति देवी बम्बोरिया
कृषि विज्ञान केंद्र, मौलासर, नागौर-341506 (राजस्थान)
महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविधालय, उदयपुर-313001 (राजस्थान)
भाकृअनुप- भारतीय मक्का अनुसन्धान संस्थान,लुधियाना-141004 (पंजाब)

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