फल छेदक:
वानस्पतिक वृद्धि के दौरान कीट लार्वा टहनियों में घुस जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप प्रभावित टहनियां गिर जाती हैं। बाद के चरणों में ऊब गए फलों के अंदर लार्वा होते हैं और मल से भरे होते हैं।
ग्रसित अंगों को नष्ट कर दें। यदि कीट अधिक हों तो स्पिनोसैड 1 मि.ली./लीटर पानी या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी (कोरजेन) 7 मि.ली./15 लीटर पानी या फ्लूबेंडियामाइड 50 मि.ली. प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
पीली नस मोज़ेक वायरस:
इस रोग का विशिष्ट लक्षण पीली शिराओं का समरूप अंतर्जात जाल है। पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है और वे रूके रहते हैं। फल छोटे आकार और सख्त बनावट के साथ पीले रंग का रूप भी देते हैं। इससे उपज में 80-90% तक की हानि होती है। यह रोग सफेद मक्खी और लीफ हॉपर से फैलता है। खेती के लिए प्रतिरोधी किस्मों का प्रयोग करें। रोगग्रस्त पौधों को खेत से दूर हटाकर नष्ट कर दें। सफेद मक्खी को नियंत्रित करने के लिए डाइमेथोएट 300 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।

Leave a Reply