एरोपोनिक्स सिस्टम

एरोपोनिक्स सिस्टम के फायदे

  1. कम समय में अधिक मात्रा में (10 गुना तक) उत्पादित रोग मुक्त बीज आलू
  2. जड़ों और पूर्वज कंदों के वातन और विकास के लिए ऊर्ध्वाधर (वर्टीकल) में बेहतर स्थान की उपलब्धता
  3. एरोपोनिक प्रणाली से लाभ होता है कि कंदों की तुड़ाई समय समय पर उपयुक्त आकर के अनुसार की जा सकती है जिससे मिनी कन्द का उत्पादन ज्यादा होता है|
  4. पोषक तत्व घोल को आसानी से समायोजित किया जा सकता है, और बीज-आलू के उत्पादन को और अधिक कुशल बनाने के लिए पोषक तत्वों और पीएच मान की सटीक निगरानी की जा सकती है।
  5. इस विधि से बीजोत्पादन उन क्षेत्रों में भी किया जा सकता है जहां पर जुताई योग्य मिटटी उपलब्ध नहीं है और पानी की उपलब्धता भी बहुत कम है|
  6. इस विधि से साल में एक की बजाय दो फसलें भी पैदा की जा सकती है|
  7. बीज का आकर बहुत छोटा (2-4 ग्राम) होने के कारण परिवहन खर्च में भी बहुत कम लागत आती है|
  8. प्राकृतिक, स्वस्थ पौधों और फसलों के उत्पादन के लिए एरोपोनिक्स सुरक्षित और पारिस्थितिक अनुकूल माना जाता है।
  9. एरोपोनिक्स के मुख्य पारिस्थितिक लाभ पानी और ऊर्जा का संरक्षण हैं।

कमियां-

एरोपोनिक्स का उपयोग करके व्यापक पैमाने पर आलू के पूर्व-मूल (प्री-बेसिक) बीज की आर्थिक रूप से व्यवहार्य प्रस्तुतियों को इस तकनीक की उच्च लागत और सीमाओं को ध्यान में रखना चाहिए। हालांकि, कई अध्ययन इस बात के पुख्ता सबूत देते हैं कि उष्ण कटि बंधीय और गर्म-समशीतोष्ण परिस्थितियों के तहत मिनीट्यूबर के उत्पादन के लिए एरोपोनिक्स एक पर्याप्त विकल्प है।

आलू के पौधे को विकसित रखने के लिए निरंतर छिड़काव की आवश्यकता को बनाए रखने के लिए एरोपोनिक्स उत्पादन का मुख्य नुकसान इसकी विद्युत शक्ति पर निर्भरता है और पानी पंपों को बिजली के किसी भी लंबे समय तक रुकावट से पौधों को अपरिवर्तनीय नुकसान हो सकता है।

एरोपोनिक्स का प्रबंधन करने वाले तकनीशियनों को फसल शरीर विज्ञान का अतिरिक्त ज्ञान होना आवश्यक है।


लेखक:

सुगनी देवी, मो.अब्बास शाह, रत्ना प्रीती कौर और सुखविंदर सिंह

वैज्ञानिकआईसीएआर- केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र, जालंधर


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