गेंहूॅ फसल:
- पत्ती व तना भेदक की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 200 ग्राम प्रति हैक्टेयर या क्यूनलफॉस 25ई.सी. दवा 250 ग्राम प्रति हैक्टेयर का प्रयोग करें।
- प्रोपीकोनाजोल 0.1 प्रतिशत के घोल का छिडकाव करे।
- गेहूॅ की पछेती किस्मों में बुआई के 17 से 18 दिन बाद सिचाई करें तथा उसके बाद 15-20 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहे।
- गेंहूं की फसल को चूहों से बचाने के लिए जिकं फॉस्फाइड से बने चारे अथवा एल्यूमिनियम से बनी टिकिया का प्रयोग करें।
सब्जियॉं:
- प्याज के पौधों की रोपाई करें।
- प्याज के पौधों की रोपाई के बाद सिचाई करें तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के बाद पैन्डामैथिलिन दवा 2.5 लिटर प्रति हैक्टेयर के दर से छिडकाव करें।
- गोभी वर्गीय फसल में सिचाई गुडाई व मिटटी चढाने का काम करें।
- पिछले माह रोपी गई टमाटर की फसल में स्टेकिगं यानि सहारा देने का काम करें।
- टमाटर व प्याज में जिक व बोरान की कमी होने पर 20-25 किलो जिकं सल्फेट व बोरेक्स का प्रयोग करे।
दलहनी फसल
- मटर में फली भेदक के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 200 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हैक्टेअर की दर से 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें।
- मटर में पत्ती भेदक के लिए मेटासिस्टॉक्स 20 ईसी दवा 1 लिटर प्रति हैक्टेयर की दर से छिडकाव करें।
- मटर में बुकनी रोग यानि पाऊडरी मिल्डयू की रोकथाम के लिए 3 किग्रा घुलनशील गंधक 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर भूमि में 10-12 दिन के अंतराल पर छिडाव करें।
फल फसलें:
- आम के नवरोपित एवं अमरूद , पपीता व लीची के बागों की सिंचाई करे।
- आम के वृक्षों को भुनगा कीट से बचाने के लिए मोनोक्रोटोफॉस 0.04 प्रतिशत घोल का छिडकाव करें।
- अंगूर में कटाई छटाई का कार्य पूरा करलेना चाहिए।
- अंगूर में प्रथम वर्ष गोबर या कम्पोस्ट खाद के अलावा 100 ग्राम फॉस्फेट व 80 ग्राम पोटाश भी प्रति पौधा डालें
- नींबू वर्गीय पौधों में 50 से 75 किलोग्राम कम्पोस्ट प्रति पौधा डालें
- अमरूद के फलों की तुडाई करें।
- पपीते के बीजों की बुवाई पोलिहाउस में करें।
पूसा कृषि पंचाग, भा.क्अनू.सं.

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