राजस्थान में कृषि यंत्रों के क्रय पर मिल रहा 50 प्रतिशत तक का अनुदान

खेती- किसानी में कृषक द्वारा जुताई, बीज बुवाई, फसल कटाई जैसे अनेक कठोर कार्यों  को सुलभ बनाने में कृषि यंत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है। खेती में यंत्रीकरण से उत्पादन एवं उत्पादकता दोनों में बढ़ोतरी होती है। लेकिन आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं होने के कारण किसानों का महंगे कृषि उपकरण क्रय कर पाना संभव नहीं हो पाता है। इन्हीं किसानों को लाभान्वित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा राजस्थान कृषि तकनीकी मिशन के तहत हस्त चलित, शक्ति चलित, ट्रैक्टर चलित, स्वचलित जैसे अन्य श्रेणी के कृषि यंत्रों के क्रय पर किसानों को अनुदान दिया जा रहा है, जिससे किसानों पर आर्थिक भार नही पड़ेगा और कृषि का काम आसान हो जाएगा। साथ ही फसल के उत्पादन में वृद्धि होने से उनकी आय में भी इजाफा होगा।

कृषि यंत्रों के क्रय पर 91 करोड़ रुपये से अधिक का दिया अनुदान

कृषि आयुक्त श्री कानाराम ने बताया कि राजस्थान कृषि तकनीक मिशन के तहत गत 4 वर्षों में 43 हजार 396 किसानों को कृषि यंत्रों के क्रय पर 91 करोड़ 44 लाख रुपये का अनुदान देकर लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत द्वारा कृषि बजट घोषणा 2023-24 के अनुसार एक लाख किसानों को कृषि यंत्रों के क्रय पर 250 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है।

अनुसूचित जाति, जनजाति, लघु, सीमांत एवं महिला किसानों को मिल रहा 50 फीसदी तक अनुदान

कृषि आयुक्त ने कहा कि योजना के अंतर्गत पावर टिलर्स, स्वचालित यंत्र, विशिष्टिकृत स्वचालित यंत्र जैसे अनेकों उपकरणों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु, सीमांत एवं महिला किसानों को कृषि यंत्र के क्रय पर राज्य सरकार द्वारा लागत राशि का 50 प्रतिशत तक का अनुदान देय है। वहीं अन्य किसानों के लिए लागत का 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है।

कृषकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

श्री कानाराम ने बताया कि मिशन के अंतर्गत लाभ लेने के लिए किसान राज किसान साथी पोर्टल पर जन आधार कार्ड के माध्यम से आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

श्रवण लाल और अजय कुमार की आय में हुई वृद्धि- जयपुर जिले के ग्राम डेहरा निवासी श्रवण लाल ने बताया कि उन्होंने कृषि विभाग द्वारा अनुदान पाकर हल एवं बीज बुवाई यंत्र खरीदा है। जिससे वे खेत मे जुताई और बीज की बुवाई करते हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले वे किराये के यंत्रो से कृषि कार्य करवाते थे तो समय पर जुताई और बीज की बुवाई नहीं हो पाती थी जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता था। लेकिन अब ये खेती के काम को करने में किसी पर निर्भर नहीं हैं और अब समय पर जुताई और बुवाई कर पाते हैं इससे उनकी उपज में वृद्धि होने से आय में भी इजाफा हुआ है।

Source: Krishakjagat.org


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    😳

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