Author: Sewa Bharati

  • ककड़ी वंश सब्जियों का पाउडरी मिल्ड्यु रोग

    ककड़ी वंश सब्जियों का पाउडरी मिल्ड्यु रोग

    ककड़ी वंश सब्जियों का एक महत्वपूर्ण समूह है जो कुकुरबिटेसी परिवार से संबंधित है, जो पूरे भारत और दुनिया के अन्य उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। भारत में मुख्य रूप से खाद्य फसलों के रूप में उगाई जाने वाली फसलों में ककड़ी वंश सब्जियों की एक समृद्ध विविधता है…

  • सोयाबीन में खरपतवार, कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए सलाह

    सोयाबीन में खरपतवार, कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए सलाह

    खरपतवार नियंत्रण के लिए अभी तक किसी भी प्रकार के खरपतवारनाशकों का प्रयोग नहीं करने वाले किसानों को सलाह है कि 15-20 दिन की फसल होने पर सोयाबीन के लिए अनुशंसित खड़ी फसल में उपयोगी किसी एक रसायनिक खरपतवार नाशक का छिडक़ाव करें। बोवनी पूर्व बोवनी के तुरंत बाद उपयोगी खरपतवारनाशक का छिडक़ाव करने वाले…

  • हरी खाद हरियाली लाये 

    हरी खाद हरियाली लाये 

    हरी खाद का उपयोग कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पुराने समय से चला आ रहा है उस समय चूंकि आबादी सीमित थी जोत लम्बी-चौड़ी थी इस कारण बुआई उपरांत जितना भी अन्न मिलता था उसे ईश्वर की कृपा मानकर स्वीकारा जाता था, धीरे-धीरे समय बदला, आबादी बढ़ी खेती के बंटवारे में परिवार बढऩे के…

  • गेहूँ की चोकर के सेवन से स्वास्थ्य लाभ

    गेहूँ की चोकर के सेवन से स्वास्थ्य लाभ

    घर की रसोई में गेहूँ के चोकर का उपयोग गेहूँ चोकर का स्वाद मीठा होता है, लेकिन यह देखने में आकर्षक नहीं लगता है। इसको खाने में थोड़ा-थोड़ा उपयोग लाभदायक है, लेकिन थोड़ी सी अधिक मात्रा दस्तावर हो सकती है। मफिन्स, बिस्कुट, ब्रेड, पैनकेक, नूडल्स, स्नैक्स बन्स, वॉफल, कुकीज एवं केक आदि में गेहूँ की…

  • लाभकारी है गेहूँ की चोकर का सेवन

    लाभकारी है गेहूँ की चोकर का सेवन

    भारत में उगाई जाने वाली फसलों में गेहूँ एक प्रमुख अनाज की फसल है। गेहूँ के दाने से प्राप्त उच्च कैलोरी के कारण  दुनिया की एक तिहाई से भी अधिक आबादी द्वारा उपभोग की जाने वाली प्रमुख खाद्य फसल है। गेहूँ एक पौष्टिक अनाज होने के साथ-साथ प्रोटीन, खनिज, विटामिन बी एवं आहार रेशा का…

  • मृदा-जनित रोग प्रबंधन के लिए ट्राइकोडर्मा अपनाएं

    मृदा-जनित रोग प्रबंधन के लिए ट्राइकोडर्मा अपनाएं

    हमारे खेत की मिट्टी में अनेकों प्रकार के फफूंद पाए जाते हैं। ट्राइकोडर्मा मिट्टी में पाए जाने वाला एक जैविक फफूंद है जो मृदा रोग प्रबंधन हेतु अत्यंत उपयोगी पाया गया है। जैविक खेती में रोग प्रबंधन हेतु बीज तथा मृदा के  उपचार हेतु ट्राइकोडर्मा के प्रयोग  की अनुशंसा की जाती है। ट्राइकोडर्मा को मित्र…

  • जैव उर्वकों से लाभ

    जैव उर्वकों से लाभ

    ये अन्‍य रासायनिक उर्वकों से सस्‍ते होते हैं जिससे फसल उत्‍पादन की लागत घटती है।जैव उर्वरकों के प्रयोग से नाईट्रोजन व घुलनशील फास्‍फोरस की फसल के लिए उपलब्‍धता बढतीहैं।इससे रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो जाता है जिससे भूमि की मृदा संरचना । जैविक खाद से पौधों मे वृद्धिकारक हारमोन्‍स उत्‍पन्‍न होते हैं जिनसे उनकी की…

  • मृदा उर्वरता में सुधार में जैव उर्वरकों की भूमिका

    मृदा उर्वरता में सुधार में जैव उर्वरकों की भूमिका

    रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से उपज में वृद्धि तो होती है परन्‍तू अधिक प्रयोग से मृदा की उर्वरता तथा संरचना पर भी प्रतिकूल प्रभाव पडता है इसलिए रासायनिक उर्वरकों (Chemical fertilizers) के साथ साथ जैव उर्वरकों (Bio-fertilizers) के प्रयोग की सम्‍भावनाएं बढ रही हैं। जैव उर्वरकों के प्रयोग से फसल को पोषक तत्‍वों की आपूर्ति होने…

  • पराली जलाने से निपटने की रणनीतियां

    पराली जलाने से निपटने की रणनीतियां

    त्वरित अपघटन प्रक्रिया के माध्यम से ठूंठों को भी ठीक से संभाला जा सकता है। हाल ही में, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने ‘पूसा डीकंपोजर’ नामक एक माइक्रोबियल कॉकटेल विकसित किया है जो त्वरित अपघटन के माध्यम से अवशेषों को खाद में बदल सकता है। इस प्रक्रिया में डीकंपोजर कैप्सूल का उपयोग करके एक…

  • पराली जलाने के आंकड़े और समस्याएं

    पराली जलाने के आंकड़े और समस्याएं

    पराली जलाने का मुख्य कारण चावल की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच उपलब्ध कम समय है। आंशिक रूप से, चावल और गेहूं के बीच उपलब्ध इस कम समय सीमा को पंजाब उप-भूमि संरक्षण अधिनियम (2009) के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जहां धान की रोपाई की तारीख 20 जून तय की गई…