Category: Training
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बुवाई बाद गेहूं फसल में खरपतवार नियंत्रण
बुवाई बाद गेहूं फसल में खरपतवार नियंत्रण – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर द्वारा गेहूं फसल में बुवाई बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए उपचार बताए हैं, जो इस प्रकार हैं- खरपतवारनाशी का छिडक़ाव बुवाई के 30-35 दिन बाद 120-150 लीटर पानी में प्रति एकड़ फ्लैट फैन नोजल के द्वारा करें। मिश्रित खरपतवार के लिए– टोटल…
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गेहूं की बंपर फसल के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशें
गेहूं की बंपर फसल के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशें – बीज दर और बुवाई की विधि – बीज दर दानों के आकार, जमाव प्रतिशत, बोने का समय, बोने की विधि एवं भूमि की दशा पर निर्भर करती है। सामान्यत: यदि 1000 बीजों का भार 38 ग्राम है तो एक हेक्टेयर के लिये लगभग 100 कि.ग्रा.…
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गेहूं में गंधक (Sulphur) की कमी को दूर करें
गेहूं में गंधक (Sulphur) की कमी को दूर करें – गंधक (Sulphur) की कमी को दूर करने के लिये गंधक युक्त उर्वरक जैसे अमोनियम सल्फेट अथवा सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग अच्छा रहता है। जस्ते की कमी वाले क्षेत्रों में जिंक सल्फेट 25 कि.ग्रा./हे. की दर से धान-गेहूं फसल चक्र वाले क्षेत्रों में साल में कम से कम एक बार प्रयोग…
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ग्लेडियोलस से होगा किसानों को लाभ
ग्लेडियोलस से होगा किसानों को लाभ – ग्लेडियोलस एक बहुत ही सुन्दर फूल है जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय कट फ्लावर में से एक है। इसके पौधों की ऊंचाई 2 से 8 फीट तक होती है। ग्लेडियोलस फूलों के रंग और आकार के आधार पर एक बहुत बड़ा समूह है। एक स्पाईक या एक दंडी में 15…
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बरसात के बाद (रबी) ज्वार लगायें
बरसात के बाद (रबी) ज्वार लगायें – भूमि की तैयारी : गर्मियों में मोल्ड बोर्ड हल से एक गहरी जुताई के बाद 3 से 4 हैरो से जुताई करें। अच्छे बीज क्यारी प्राप्त करने और खरपतवार मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए जल प्रति धारण में सुधार करने के लिए 10 3 10 मीटर के कंपार्टमेंटल मेड़…
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ज्वार में डाउनी मिल्ड्यू (फफूंदी) का नियंत्रण
ज्वार में डाउनी मिल्ड्यू (फफूंदी) का नियंत्रण – सबसे विशिष्ट लक्षण पत्तियों पर चमकीली हरी और सफेद धारियों का दिखना और संक्रमित पत्तियों की निचली सतह पर ओस्पोर्स के सफेद धब्बे हैं। व्यवस्थित रूप से संक्रमित पौधे क्लोरोटिक हो जाते हैं और ऐसे पौधे आमतौर पर पुष्पगुच्छ फेंकने में विफल रहते हैं। यहां तक कि यदि पुष्पगुच्छ निकलते…
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खरीफ में ज्वार की खेती की सम्पूर्ण जानकारी
खरीफ में ज्वार की खेती की सम्पूर्ण जानकारी – जल-सीमित परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता के साथ ज्वार एक टिकाऊ कृषि मॉडल में बहुत अच्छी तरह से फिट बैठता है और सीमांत किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प प्रदान करता है। खरीफ में ज्वार की खेती के लिए जलवायु ज्वार को गर्म जलवायु की आवश्यकता…
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कचरे से तैयार करें उत्तम खाद
कचरे से तैयार करें उत्तम खाद – भारतीय कृषि क्षेत्र में पिछले चार दशकों से फसल उत्पादन में जो वृध्दि आई है, इसका मुख्य कारण उन्नत तकनीकों को अपनाया जाना और अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन कृत्रिम पदार्थों का भारी मात्रा में प्रयोग…
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मीठी ज्वार की खेती
मीठी ज्वार की खेती – गोड़ ज्वारी (मराठी), मिष्ठी ज्वार (बंगाली), जोला (कन्नड़), चोलम (मलयालम, तमिल), जोनालू (तेलगू), आदि नामों से कही जाने वाली मीठी ज्वार अनाज के ज्वार के समान है, लेकिन गन्ने की तरह इसके डंठल में शर्करा (10-15 प्रतिशत) जमा होती है। यह गन्ने की तुलना में कम पानी और आदान आवश्यकता वाली…
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खरबूजे और देसी गोमूत्र से बने जैव कीटनाशक ‘थार जैविक 41 ईसी’ को मिला पेटेंट
खरबूजे और देसी गोमूत्र से बने जैव कीटनाशक ‘थार जैविक 41 ईसी’ को मिला पेटेंट – भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने पेटेंट अधिनियम 1970 के तहत कीट नियंत्रण के लिए जैव-कीटनाशक ‘थार जैविक 41 ईसी’ पेटेंट दिया है। थार जैविक 41 ईसी जैव-कीटनाशक सिट्रलस कॉलोसिंथस (Citrullus colocynthis) और देसी गोमूत्र से बनाया गया है। सिट्रलस कॉलोसिंथस को बिटर ऐपल के नाम से भी जाना जाता है। आईसीएआर – केंद्रीय…