Category: Training

  • साइलेज: डेरी व्यवसाय में आहार प्रबंधन का उत्तम श्रोत

    साइलेज: डेरी व्यवसाय में आहार प्रबंधन का उत्तम श्रोत

    साइलेज को पशु पालन व्यवसाय के लिए एक संजीवनी आहार के तौर पर देखा जा सकता है। यह पोषक तत्वों मे हरे चारे के सामान ही होता है। पशु पालन व्यवसाय पर होने वाले कुल खर्च या लागत का लगभग 65 – 70% चारा एवं दाना पर होता है। चारे की लागत को कम करने…

  • सतत कृषि तकनीक

    सतत कृषि तकनीक

    सतत कृषि समाज की वर्तमान खाद्य और कपड़ा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थायी तरीके से खेती कर रही है, वर्तमान या भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए बिना। सतत कृषि के महत्वपूर्ण बिंदु टिकाऊ कृषि के व्यवसायी अपने काम में तीन मुख्य उद्देश्यों को एकीकृत करना चाहते हैं: सतत कृषि के प्रमुख पहलू पानी जल प्रमुख संसाधन है जिसने कृषि और समाज को समृद्ध होने में मदद की…

  • शीतकालीन गेंदे की व्यावसायिक खेती कैसे करें

    शीतकालीन गेंदे की व्यावसायिक खेती कैसे करें

    भारतवर्ष में गेंदा हर घर में हर मौके पर इस्तेमाल होने के कारण अब यह एक व्यावसायिक नकदी फसल बन गया है। यह फूल सजावटी गमलों में भी प्रयोग किया जाता है साथ ही यह गमलों की दहलीज पार कर बड़े बड़े खेतों में पहुंच गया है। गेंदा की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह…

  • लेमनग्रास के औषधीय गुण

    लेमनग्रास के औषधीय गुण

    लेमन ग्रास का नाम सुनते ही आपके दिमाग में जरूर हरी-हरी घास की तस्वीर आई होगी। लेमन ग्रास एक प्रकार की चमत्कारी घास है। लेमन ग्रास खासकर दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाता है। यह घास जैसा ही दिखता है, बस इसकी लंबाई आम घास से ज्यादा होती है। वहीं, इसकी महक नींबू जैसी होती है और…

  • रसोई उद्यान के माध्यम से पारिवारिक पोषण

    रसोई उद्यान के माध्यम से पारिवारिक पोषण

    रसोई उद्यान या घर उद्यान या पोषण उद्यान मुख्य रूप से परिवार के उपयोग के लिए ताजा सब्जियों को प्रदान करने का इक माध्यम है। विभिन्न सब्जियों को पाने के लिए उपलब्ध जमीन में विभिन्न सब्जियां अलग अलग समय में उगाई जाती हैं। बगीचे का क्षेत्र, लेआउट, फसल चयन भूमि की उपलब्धता और प्रकृति पर…

  • चाइना एस्टर की आधुनिक खेती

    चाइना एस्टर की आधुनिक खेती

    चाइना एस्टर एक बहूत ही महत्वपूर्ण वार्षिक फूल है । वार्षिक फूलो में गुलदावदी तथा गेंदा के बाद तीसरे स्थान पर आता है | हमारे देश के सीमांत और छोटे किसान बड़े पैमाने पर पारंपरिक फसल के रूप में इसकी खेती करते हैं। चाइना एस्टर नारियल के बागानों में मिश्रित फसल के रूप में भी…

  • ग्लेडियोलस फूल की खेती से कमाए मुनाफा

    ग्लेडियोलस फूल की खेती से कमाए मुनाफा

    ग्लेडियोलस दुनिया के सुन्दर फूलो में से एक है, यह इरिडेसि कुल का पुष्पीय पौधा है | लैटिन भाषा के शब्द ग्लेडियस से ग्लेडियोलस शब्द लिया गया है, जिसका आशय तलवार से है | यह एक बहुवर्षिय पौधा है, जिसकी पत्तिया तलवार के समान होती है | ग्लेडियोलस मुख्य पारम्परिक रूप से कटे फूलो के लिए उगाया जाता है, इसके कटे फूल को स्पाइक बोलते है | ग्लेडियोलस में विभिन्न रंगो की किस्मे उपलब्ध होने के कारण यह काफी मशहूर फूल है | विश्व में यह फूल मुख्य रूप से अमेरिका, हॉलेंड, फ्रांस, इटली, ब्राज़ील, तथा भारत में मुख्ये रूप से उगाया जाता है |   भारत में ग्लेडियोलस कुल फूलो के उत्पादन में तीसरे स्थान पर आता है | भारत में इसकी खेती मुखतया उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीशा, छत्तीशगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तथा सिक्किम में की जाती है | प्राकर्तिक रूप से तो यह एक शीतकालीन फूलदार पौधा है, लेकिन मध्यम जलवायु में इसकी खेती पुरे साल भर भी की जा सकती है | ग्लेडियोलस में फूल खिलने की अवधी 10 से 12 दिन की होती है | ग्लेडियोलस को ओषधीय रूप में भी काम में लिया जाता है  ग्लेडियोलस उगानें के लिए भूमि एवं जलवायु ऐसी सभी सामान्य प्रकार के मृदायें जिनमे पानी का ठहराव नहीं होता हो उनमे ग्लेडियोलस को आसानी से उगाया जा सकता है, लेकिन इसकी खेती के लिए कार्बनिक पदार्थ से युक्त बलुई दोमट मिट्टी जिसका पीएच्. मान 6 से 7 के बीच हो सबसे अच्छी रहती है | इसकी खेती के लिए उष्ण कटिबंधीय तथा उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु दशाएं सही रहती है | 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान ग्लेडियोलस की खेती के लिए सबसे अच्छा माना गया है | अधिक ठण्डी तथा अधिक गर्म दोनों ही प्रकार की जलवायु इस पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, इस के साथ साथ पुष्पन के समय वर्षा इस के लिए हानिकारक होती है | किस्मो का चयन ग्लेडियोलस की किस्मो का चयन करते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए की हम इसको किस उद्देशय के लिए उगा रहे है | उद्देशय के अनुसार आप अलग अलग रंगो तथा अलग अलग आकार की स्पाइक वाली किस्मो का चयन कर सकते हो | खेत को तैयार करना ग्लेडियोलस को उगाने के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद दो से तीन जुताई कल्टीवेटर से कर के पाटा लगाना चाहिए जिससे भूमि समतल हो जाए | ग्लेडियोलस की जड़े कम गहराई जाती है, इस लिए खेत को अच्छे से भुरभुरा बना लेना चाहिए, जिससे हवा का आदान प्रदान अच्छे से हो सके| 200 से 300 कविण्टल अच्छे से सड़ीगली गोबर की खाद खेत में आखिरी जुताई के समय मिला देनी चाहिए | ग्लेडियोलस फूलों की बुवाई ग्लेडियोलस के अच्छे फूल उत्पादन एवं अच्छे घनकन्द उत्पादन के लिए इसकी बुवाई सही समय पर करना बहुत जरूरी होता है | ग्लेडियोलस की बुवाई का सही समय भारत के मैदानी भागो के लिए 15 अक्टूम्बर उत्तम समय माना गया है, तथा ग्लेडियोलस की बुवाई पर्वतीय भागो में मार्च से मई तक कर देनी चाहिए| ग्लेडियोलस की एक हेक्टेयर में बुवाई करने के लिए 28000 से 42000 कंदो की आवश्यकता होती है | ग्लेडियोलस की बुवाई के लिए पौधे से पौधे तथा कतार से कतार के बीच 15 सैमी की दुरी रखनी चाहिए, या इसकी सघन बुवाई के लिए पौधे से पौधे के बिच 15 सैमी तथा कतार से कतार के बीच 25 सैमी की दुरी रखनी चाहिए | पौधो को बीज जनित रोगो से बचाने के लिए कंदो को लगभग आधे घण्टे तक बाविस्टिन के 0.2 प्रतिशत घोल में डुबाकर छाया में सूखा कर बुवाई करनी चाहिए | ग्लेडियोलस कंदो की सुशुप्तावस्था को दूर करना ग्लेडियोलस के कंदो की सुशुप्तावस्ता को दूर करने के लिए इसके के कंदो को कम तापमान (3 से 4 डिग्री सैल्सियस) पर भण्डारण करना चाहिए, तथा इस के साथ साथ रसायनो…

  • गेलार्डीया की उन्नत खेती

    गेलार्डीया की उन्नत खेती

    मानव जीवन में फूलो का जो महत्व है, वो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है | मानव जीवन की शुरुआत फूलो के साथ होती है, मानव फूलो के साथ रहता है तथा मरता भी फूलो के साथ ही है | मानव जीवन में फूलो का उपयोग कई रूपों में किया जाता है | फूलो के उपयोग धार्मिक रीती रिवाजो में घर आँगन को सजाने में तथा मानव शरीर को सजाने के लिए भी किया जाता है | भारत में फूलो की खेती की अपार संभावनाएं है ऐसे में यदी किसान भाई अन्य फसलों के साथ साथ फूलो को भी उगाते है तो किसानो को अधिक मुनाफा हो सकता है | गेलार्डिया मौसमी पुष्पों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है | गेलार्डिया को शर्दी, बरसात तथा गर्मी तीनो ही मौसम में आसानी से उगाया जा सकता है | गेलार्डिया की बुवाई फरवरी-मार्च में करने पर फूल गर्मियों में, मई-जून में बुवाई करने पर फूल बरसात में तथा सितम्बर-अक्टुम्बर में बुवाई करने पर शर्दियो में फूल प्राप्त कर सकते है | जलवायु एवं भूमि गेलार्डिया को खुले आसमान के नीचे अच्छे से उगाया जा सकता है | गेलार्डिया से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए अच्छी धुप, तथा वायु संचार होना चाहिए | गेलार्डिया के लिए गहरी मृदा अच्छी होती है, तथा साथ साथ भूमि की जल धारण क्षमता भी अच्छी होनी चाहिए | गेलार्डिया की अच्छी पैदावार के लिए 6.0 से 8.0 पीएच् मान वाली भूमि अच्छी मानी गई है |   गेलार्डिया की मुख्य प्रजातिया गेलार्डिया में मुख्य रूप से 2 जातिया उगाई जाती है | गेलार्डिया पिक्टा  : गेलार्डिया पिक्टा में बड़े आकार के पुष्प आते है | गेलार्डिया लोरेंजियना: गेलार्डिया लोरेंजियना प्रजाति में फूल पंखुड़ियों वाले, विखंडित कोरो तथा एक ही पुष्प में कई रंगो के साथ डबल प्रकार के पुष्प पाए जाते है…

  • गेंदे की उन्नत खेती की संपूर्ण जानकारी

    गेंदे की उन्नत खेती की संपूर्ण जानकारी

    गेंदे (मेरिगोल्ड) की खेती हमारे देश में लगभग हर क्षेत्र में की जाती है| यह बहुत महत्तवपूर्ण फूल की फसल है| क्योंकि इसका उपयोग व्यापक रूप से धार्मिक और सामाजिक कार्यों में किया जाता है| इसके प्रमुख उत्पादक राज्य महांराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्रा प्रदेश, तामिलनाडू और मध्य प्रदेश है| गेंदे की खेती व्यवसायिक रूप से…

  • गुलदाउदी की उन्नत खेती

    गुलदाउदी की उन्नत खेती

    गुलदाउदी शर्दियो में उगाए जाने वाले फूलो में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, एवं गुलदाउदी शर्दियो में उगाया जाने वाला एक लोकप्रिय पुष्प है, इस लिए गुलदाउदी को शर्दी के मौसम की रानी, सेवन्ति तथा चंद्रमल्लिका के नाम से भी जाना जाता है | गुलदाउदी के फूलो के रंग, आकार तथा बनावट में अन्य फूलो की…