Category: Training
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औषधीय पौधा अशवगंधा को लगाकर प्राप्त करे अधिक आमदनी
अशवगंधा (असगंधा) जिसे अंग्रेजी में विन्टर चैरी कहा जाता है तथा जिसका वैज्ञानिक नाम विदानिया सोमनिफेरा है, भारत में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण औषधीय फसल है जिसमें कई तरह के एल्केलाइड्स पाये जाते है। अशवगंधा को शक्तिवर्धक माना जाता है। भारतवर्ष में यह पौधा मुख्यतया गुंजरात, मध्यप्रदेष, राजस्थान, पष्चिमी उत्तरप्रदेष, पंजाब, हरियाणा के मैदान, महाराष्ट्र,…
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सफेद मुसली की खेती
सफेद मूसली (क्लोरोफाइटम स्पीशीज) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है जिसकी विभिन्न प्रजातियां की जड़ों का उपयोग आयुर्वेदिक व यूनानी दवाएं बनाने में किया जाता है इसकी सुखी जड़ों में पानी की मात्रा 5 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट 42 प्रतिशत प्रोटीन 8-9 प्रतिशत रूट फाइबर ग्लुकासेाइल सेपोनिन 2-17 प्रतिशत के साथ-साथ सोडियम पोटेशियम कैल्शियम फास्फोरस व जिंक आदि…
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मशरूम की खेती अधिक लाभदायक है
वर्षा ऋतु में मिट्टी में से अपने आप छतरीनुमा आकार के सफेद, लाल, भूरे विभिन्न रंगों के फफूँद या क्षत्रक उगते हैं। यही फफूँद मशरूम (mushroom) कहलाते हैं। इसे फुटू या पीहरी भी कहा जाता है। यह फफूँदो का फलनकाय होता है। जो पौश्ष्टिक, रोगरोधक, स्वादिष्ट तथा विशेष महक के कारण आधुनिक युग का महत्त्वपूर्ण…
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तुलसी के रोग एवं नियंत्रण
तुलसी (Basil) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा हैं। यह झाड़ी के रूप में उगताहैं और १ से ३ फुट ऊँचा होता हैं। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं ८ इंच लम्बी…
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इशबगोल के औषधीय गुण तथा उसका उत्पादन
इशबगोल एक प्रकार का औषधीय पौधा होता है,यह अधिकतर मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है| यह भारत में मालवा एवं सिंध, अरब की खाड़ी और पर्शिया में पाया जाता है| इशबगोल को आयुर्वेद में अश्व्गोल या अश्वकर्ण के रूप में जाना जता है, जिसका शाब्दिक अर्थ “घोड़े की तरह कान है| इशबगोल का वैज्ञानिक नाम प्लैन्तेगो…
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सामान्य बीमारियों के लिए प्रमुख औषधीय पौधे
प्राचीन काल से ही मनुष्य सामान्य रोगों के शमन के लिए अपने दैनिक जीवन में औषधीय पौधों का प्रयोग करते आ रहा है। इस आधार पर सामान्य रोगो के चिकित्सा को सर्वसुलभ तथा सस्ता बनाया जा सकता है। अपने पूरे जीवनकल में हम इन औषधीय पौधों का उपयोग किसी न किसी रूप में करते हैं।…
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धनिया की खेती
धनिया का वानस्पतिक नाम कोरिएन्ड्रम सेटाइवम है। यह अम्बेलीफेरी कुल का पौधा है । धनिया मसालों की एक प्रमुख फसल है। धनिये की पत्तियाँ व दाने दोनों का ही उपयोग किया जाता है। प्राचीन काल से ही विश्व में भारत देश को मसालों की भूमि के नाम से जाना जाता है। धनिया के बीज एवं…
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मेंथा (पुदीना) की उन्नत खेती
मेंथा का तेल व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण योगदान रखता है। इसका व्यापक रूप से प्रयोग दवा उद्योग में किया जाता है। प्राचीन काल से ही मेंथा (पुदीना) को किचन गार्डनिंग में प्रयोग किया जाता था। प्राथमिक रूप से मेंथा के तेल में मेंथाल पाया जाता है। मेंथा के तेल का प्रयोग ज्यादातर टूथपेस्ट के स्वाद…
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किसानो को ईख बीज उत्पादन तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल
ईख की खेती में अधिक उत्पादन के लिए उपयुक्त प्रभेद का चयन महत्वपूर्ण होता है। परंतु प्रभेद अच्छा हो लेकिन उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं हो तो प्रभेद की महत्ता ख़त्म हो जाती है। ईख में चूँकि शुद्ध बीज का प्रयोग व्यवसायिक स्तर पर नहीं होता है इसलिए उसे ईख का बीज न कहकर बीज का…
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आलू बीज उत्पादन में एरोपोनिक तकनीक का अनुप्रयोग
आलू एक वनस्पतिक रूप से पैदा होने वाली फसल हैं जिसके फलस्वरूप आलू के कंद विभिन्न वेक्टर प्रेषीत वायरल संक्रमणों से ग्रस्त हो जाते है, जो साल दर साल इसकी उत्पादकता को गंभीरता से प्रभावित करते हैं। इसलिए लाभदायक उत्पादन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करना आवश्यक है। लेकिन, मुख्य रूप से…