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  • शीतकालीन गेंदे की व्यावसायिक खेती कैसे करें

    शीतकालीन गेंदे की व्यावसायिक खेती कैसे करें

    भारतवर्ष में गेंदा हर घर में हर मौके पर इस्तेमाल होने के कारण अब यह एक व्यावसायिक नकदी फसल बन गया है। यह फूल सजावटी गमलों में भी प्रयोग किया जाता है साथ ही यह गमलों की दहलीज पार कर बड़े बड़े खेतों में पहुंच गया है। गेंदा की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह…

  • लेमनग्रास के औषधीय गुण

    लेमनग्रास के औषधीय गुण

    लेमन ग्रास का नाम सुनते ही आपके दिमाग में जरूर हरी-हरी घास की तस्वीर आई होगी। लेमन ग्रास एक प्रकार की चमत्कारी घास है। लेमन ग्रास खासकर दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाता है। यह घास जैसा ही दिखता है, बस इसकी लंबाई आम घास से ज्यादा होती है। वहीं, इसकी महक नींबू जैसी होती है और…

  • रसोई उद्यान के माध्यम से पारिवारिक पोषण

    रसोई उद्यान के माध्यम से पारिवारिक पोषण

    रसोई उद्यान या घर उद्यान या पोषण उद्यान मुख्य रूप से परिवार के उपयोग के लिए ताजा सब्जियों को प्रदान करने का इक माध्यम है। विभिन्न सब्जियों को पाने के लिए उपलब्ध जमीन में विभिन्न सब्जियां अलग अलग समय में उगाई जाती हैं। बगीचे का क्षेत्र, लेआउट, फसल चयन भूमि की उपलब्धता और प्रकृति पर…

  • भारत में कृषि, वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ और अवसर

    भारत में कृषि, वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ और अवसर

    विकासशील और विकसित दोनों देशों के लिए कृषि हमेशा से एक महत्वपूर्ण स्तंभ और विकास और अर्थव्यवस्था का चालक रहा है। भारत भी, 1960 के दशक में हरित क्रांति की गति के कारण उत्पादन और उत्पादकता के मामले में कई गुना बढ़ गया है। हालांकि, अब समय आ गया है कि हम हरित क्रांति के…

  • पौदशाला में प्लास्टिक बैग का विकल्प गोबर गमला

    पौदशाला में प्लास्टिक बैग का विकल्प गोबर गमला

    प्रकृति अनादि काल से मानव की सहचरी रही है। लेकिन मानव ने अपने भौतिक सुखों एवं इच्छाओं की पूर्ति के लिये इसके साथ निरंतर खिलवाड किया और वर्तमान समय में यह अपनी सारी सीमाओं की हद को पार कर चुका है। स्वार्थी एवं उपभोक्तावादी मानव ने प्रकृति यानि पर्यावरण को पॉलीथीन के अंधाधुंध प्रयोग से…

  • पशुुओं में गांठदार त्वचा , लम्पी स्किन डिजीज

    पशुुओं में गांठदार त्वचा , लम्पी स्किन डिजीज

    लम्पी स्किन डिजीज (LSD) या गांठदार त्वचा रोग राजस्थान के कई जिलों में फैला हुआ है। यह एक तेजी से फैलने वाली विषाणु जनित बीमारी है। यह बीमारी पशुपालको के आर्थिक नुकसान का प्रमुख कारण है। यह रोग  गाय और भैंसो में मुख्य रूप से देखा गया है। इस रोग में पशु के पूरे शरीर…

  • धान में रहस्यमयी बौनापन के कारण एवं उत्पादन पर इसका विपरीत प्रभाव

    धान में रहस्यमयी बौनापन के कारण एवं उत्पादन पर इसका विपरीत प्रभाव

    धान, खरीफ मौसम में उगाए जाने वाले मुख्य खाद्यान्नों में से एक है, जिसकी बुवाई जून-जुलाई में होती है और अक्टूबर में कटाई होती है। डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में 2022 में धान का रकबा 13.27 प्रतिशत कम है, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में धान की…

  • जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्य सुरक्षाः मोटा अनाज एक उम्मीद

    जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्य सुरक्षाः मोटा अनाज एक उम्मीद

    जलवायु परिवर्तन का भारत जैसे उभरते देशों की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। यह खाद्य उपलब्धता, खाद्य पहुंच, खाद्य उपयोग और खाद्य प्रणाली स्थिरता को प्रभावित करता है जो खाद्य सुरक्षा के चार आयाम है। वर्तमान स्थिति में विश्व में हर तरफ जलवायु परिवर्तन के कारण मुख्य खाद्य फसलों की उत्पादकता…

  • चाइना एस्टर की आधुनिक खेती

    चाइना एस्टर की आधुनिक खेती

    चाइना एस्टर एक बहूत ही महत्वपूर्ण वार्षिक फूल है । वार्षिक फूलो में गुलदावदी तथा गेंदा के बाद तीसरे स्थान पर आता है | हमारे देश के सीमांत और छोटे किसान बड़े पैमाने पर पारंपरिक फसल के रूप में इसकी खेती करते हैं। चाइना एस्टर नारियल के बागानों में मिश्रित फसल के रूप में भी…

  • ग्लेडियोलस फूल की खेती से कमाए मुनाफा

    ग्लेडियोलस फूल की खेती से कमाए मुनाफा

    ग्लेडियोलस दुनिया के सुन्दर फूलो में से एक है, यह इरिडेसि कुल का पुष्पीय पौधा है | लैटिन भाषा के शब्द ग्लेडियस से ग्लेडियोलस शब्द लिया गया है, जिसका आशय तलवार से है | यह एक बहुवर्षिय पौधा है, जिसकी पत्तिया तलवार के समान होती है | ग्लेडियोलस मुख्य पारम्परिक रूप से कटे फूलो के लिए उगाया जाता है, इसके कटे फूल को स्पाइक बोलते है | ग्लेडियोलस में विभिन्न रंगो की किस्मे उपलब्ध होने के कारण यह काफी मशहूर फूल है | विश्व में यह फूल मुख्य रूप से अमेरिका, हॉलेंड, फ्रांस, इटली, ब्राज़ील, तथा भारत में मुख्ये रूप से उगाया जाता है |   भारत में ग्लेडियोलस कुल फूलो के उत्पादन में तीसरे स्थान पर आता है | भारत में इसकी खेती मुखतया उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीशा, छत्तीशगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तथा सिक्किम में की जाती है | प्राकर्तिक रूप से तो यह एक शीतकालीन फूलदार पौधा है, लेकिन मध्यम जलवायु में इसकी खेती पुरे साल भर भी की जा सकती है | ग्लेडियोलस में फूल खिलने की अवधी 10 से 12 दिन की होती है | ग्लेडियोलस को ओषधीय रूप में भी काम में लिया जाता है  ग्लेडियोलस उगानें के लिए भूमि एवं जलवायु ऐसी सभी सामान्य प्रकार के मृदायें जिनमे पानी का ठहराव नहीं होता हो उनमे ग्लेडियोलस को आसानी से उगाया जा सकता है, लेकिन इसकी खेती के लिए कार्बनिक पदार्थ से युक्त बलुई दोमट मिट्टी जिसका पीएच्. मान 6 से 7 के बीच हो सबसे अच्छी रहती है | इसकी खेती के लिए उष्ण कटिबंधीय तथा उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु दशाएं सही रहती है | 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान ग्लेडियोलस की खेती के लिए सबसे अच्छा माना गया है | अधिक ठण्डी तथा अधिक गर्म दोनों ही प्रकार की जलवायु इस पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, इस के साथ साथ पुष्पन के समय वर्षा इस के लिए हानिकारक होती है | किस्मो का चयन ग्लेडियोलस की किस्मो का चयन करते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए की हम इसको किस उद्देशय के लिए उगा रहे है | उद्देशय के अनुसार आप अलग अलग रंगो तथा अलग अलग आकार की स्पाइक वाली किस्मो का चयन कर सकते हो | खेत को तैयार करना ग्लेडियोलस को उगाने के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद दो से तीन जुताई कल्टीवेटर से कर के पाटा लगाना चाहिए जिससे भूमि समतल हो जाए | ग्लेडियोलस की जड़े कम गहराई जाती है, इस लिए खेत को अच्छे से भुरभुरा बना लेना चाहिए, जिससे हवा का आदान प्रदान अच्छे से हो सके| 200 से 300 कविण्टल अच्छे से सड़ीगली गोबर की खाद खेत में आखिरी जुताई के समय मिला देनी चाहिए | ग्लेडियोलस फूलों की बुवाई ग्लेडियोलस के अच्छे फूल उत्पादन एवं अच्छे घनकन्द उत्पादन के लिए इसकी बुवाई सही समय पर करना बहुत जरूरी होता है | ग्लेडियोलस की बुवाई का सही समय भारत के मैदानी भागो के लिए 15 अक्टूम्बर उत्तम समय माना गया है, तथा ग्लेडियोलस की बुवाई पर्वतीय भागो में मार्च से मई तक कर देनी चाहिए| ग्लेडियोलस की एक हेक्टेयर में बुवाई करने के लिए 28000 से 42000 कंदो की आवश्यकता होती है | ग्लेडियोलस की बुवाई के लिए पौधे से पौधे तथा कतार से कतार के बीच 15 सैमी की दुरी रखनी चाहिए, या इसकी सघन बुवाई के लिए पौधे से पौधे के बिच 15 सैमी तथा कतार से कतार के बीच 25 सैमी की दुरी रखनी चाहिए | पौधो को बीज जनित रोगो से बचाने के लिए कंदो को लगभग आधे घण्टे तक बाविस्टिन के 0.2 प्रतिशत घोल में डुबाकर छाया में सूखा कर बुवाई करनी चाहिए | ग्लेडियोलस कंदो की सुशुप्तावस्था को दूर करना ग्लेडियोलस के कंदो की सुशुप्तावस्ता को दूर करने के लिए इसके के कंदो को कम तापमान (3 से 4 डिग्री सैल्सियस) पर भण्डारण करना चाहिए, तथा इस के साथ साथ रसायनो…