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  • पराली जलाने के आंकड़े और समस्याएं

    पराली जलाने के आंकड़े और समस्याएं

    पराली जलाने का मुख्य कारण चावल की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच उपलब्ध कम समय है। आंशिक रूप से, चावल और गेहूं के बीच उपलब्ध इस कम समय सीमा को पंजाब उप-भूमि संरक्षण अधिनियम (2009) के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जहां धान की रोपाई की तारीख 20 जून तय की गई…

  • भारत में पराली जलाना

    भारत में पराली जलाना

    जहां एक तरफ भारत कोविड-19 से जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ हम पर्यावरणीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य के प्रति ज्ञानिक वायु प्रदूषण में मध्यस्थता में वृद्धि के कारण उत्तर भारत में अधिक श्वसन हानि की भविष्यअपनी जिम्मेदारी को नहीं भूल सकते। पूरा विश्व एक सांस की बीमारी से जूझ रहा है। इस…

  • भारत में खेती भूमी की माप-तोल के मात्रक या इकाईयॉं

    भारत में खेती भूमी की माप-तोल के मात्रक या इकाईयॉं

    भारत के अधिकांश भागो में कृषि माप तोल के लिए गज, हाथ, गटठा, जरीब, बिस्‍सा, बिस्‍वॉनसी, उनवांनसी, कचवानसी, बीधा, किल्‍ला, एकड, हैक्‍टेयर आदि मात्रकों का प्रयोग होता हैं। इन मात्रकों को एक दुसरे मे परि‍वर्तन से से सम्‍बधित जानकारी दी गयी है। लम्‍बाई मापने के मात्रक 1 Meter (1 मीटर ) 100 Centimeter (100 सें.मी.) 39.3701 Inch (39.3701 इंच) 1 Yard (1 गज )…

  • भारत में अमरूद के फूलने और खिलने का समय

    भारत में अमरूद के फूलने और खिलने का समय

    अमरूद के पेड़ प्राकृतिक परिस्थितियों के अंतर्गत उत्तरी भारत में साल में दो बार लेकिन पश्चिमी और दक्षिणी भारत में साल भर में तीन बार अर्थात साल भर फूलों और फलों का उत्पादन करते हैं परिणामस्वरूप यह विराम अवधि (rest period) में चला जाता है और अंततः साल के अलग-अलग समय पर छोटे फसल देने…

  • ट्राइकोडर्मा का कृषि  में महत्व

    ट्राइकोडर्मा का कृषि  में महत्व

    हमारे मिट्टी में कवक (फफूदीं) की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती है इनमें से एक ओर जहाँ कुछ प्रजातियाँ फसलों को हानि (शत्रु फफूदीं)  पहॅचाते हैं वहीं दूसरी ओर कुछ प्रजातियाँ लाभदायक  (मित्र फफूदीं) भी हैं जैसे कि द्राइकोडरमा । ट्राइकोडर्मा पौधों के जड़ विन्यास क्षेत्र (राइजोस्फियर)  में खामोशी से अनवरत कार्य करने वाला सूक्ष्म कार्यकर्ता…

  • जल संरक्षण और बारानी खेती

    जल संरक्षण और बारानी खेती

    बारानी अर्थात् वर्षा आधारित क्षेत्र जो कि देश में 65-70 प्रतिशत है में जल संरक्षण के महत्व से सभी परिचित हैं। जल संरक्षण के उचित प्रबंधन में कमियों के चलते इस विशाल क्षेत्र से उत्पादन आकांक्षाओं से कम होता है। परिणामस्वरूप औसत उत्पादकता का स्वरूप ही बदल जाता है। हमारे देश में बारानी खेती का…

  • खनि‍ज युक्‍त पशु आहार बनाने की विधि

    खनि‍ज युक्‍त पशु आहार बनाने की विधि

    सबसे पहले शीरे को गर्म करके उसमें यूरिया केल्साइड पाउडर और सोडियम बैण्टोनाइट डालकर अच्छी तरह मिला लें। मिश्रण को धीरे-धीरे हिलाते हुए उसमें खनिज मिश्रण, बिनौले अथवा मूँगफली की खली आदी, को मिलाये। जब मिश्रण का तापमान 120 0C हो जाये तो इसको 10 मिनट तक अच्छी तरह मिलाये और जब सभी पदार्थ अच्छी तरह मिल जाये तो मिश्रण…

  • ट्राइकोडर्मा उत्पादन विधि

    ट्राइकोडर्मा उत्पादन विधि

    ट्राइकोडर्मा के उत्पादन की ग्रामीण घरेलू विधि में कण्डों (गोबर के उपलों) का प्रयोग करते हैं। खेत में छायादार स्थान पर उपलों को कूट- कूट कर बारिक कर देते हैं। इसमें  28 किलो ग्राम या लगभग 85 सूखे कण्डे रहते हैं। इनमें पानी मिला कर हाथों से भली भांति मिलाया जाता है। जिससे कि कण्डे का ढेर…

  • खीरा फसल और उसके उपयोग

    खीरा फसल और उसके उपयोग

    खीरा (Cucumis sativus) लौकी परिवार, Cucurbitaceae में व्यापक रूप से उगाया जाने वाला पौधा है। यह अपने एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण दुनिया भर में और भारत में खेती की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण खीरा फसलों में से एक है। भारत दुनिया में खीरा का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। अप्रैल-अक्टूबर (2020-21) मे…

  • केला उत्पादक किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव

    केला उत्पादक किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव

    उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक श्री आर.एन.एस.तोमर ने केला उत्पादक किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं । उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में जिले में तापमान कम हुआ है, अतः केले के बगीचों की सूखी पत्तियों को काटकर बाहर करें तथा पुरानी पत्तियों व डंठल को निकाल कर खेत के बाहर ढेर लगाकर उस…